कामकाजी माता-पिता के बच्चों की छुट रही है ऑनलाइन कक्षा

छोटे बच्चों की समझ से परे होती है ऑनलाइन कक्षाओं की तकनीकें

मौमिता भट्टाचार्य

कोलकाता, समाज्ञा : कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मार्च के अंतिम सप्ताह में देशव्यापी लॉकडाउन कर दिया गया था। उस दौरान बिना आवश्यकता या आपातकाल के किसी भी व्यक्ति को ना तो घरों से बाहर निकलने की अनुमति थी और ना ही परिवहन के साधन उपलब्ध थे। इस वजह से केवल निजी ही नहीं बल्कि सरकारी ऑफिसों का कामकाज भी ऑनलाइन तथा वर्क फ्रॉम होम मोड में ही किया जाता था। कोरोना काल में राज्य के सभी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश भी राज्य सरकार द्वारा दिया गया था। किन्तु ऐसी परिस्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई पर कोई असर ना पड़े, इसलिए सभी स्कूलों की तरफ से ऑनलाइन कक्षाएं करवायी जाने लगी। जैसा कि हम सभी को पता है कि ऑनलाइन कक्षाओं के लिए मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर की आवश्यकता होती है। आम तौर पर ऊंची कक्षाओं के विद्यार्थी ऑनलाइन कक्षाएं शुरु होने पर मोबाइल, लैपटॉप के माध्यम से विभिन्न ऐप या गूगल क्लासरुम पर खुद ही लॉग इन करके ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हो जाते हैं। किन्तु परेशानी होती है छोटे बच्चों को लेकर जिन्हें ना तो मोबाइल और ना ही लैपटॉप या कम्प्यूटर ठीक से चलाना आता है। आमतौर पर प्राथमिक से लेकर उच्च प्राथमिक स्तर (नर्सरी से कक्षा 8वीं) तक के बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने के लिए तकनीकि रुप से अपने अभिभावकों या घर के किसी बड़े सदस्य की सहायता की आवश्यकता होती है। किन्तु लॉकडाउन समाप्त होने के बाद पहले अनलॉक-1 में कुछ ऑफिस और संस्थान खुल गये थे और अब अनलॉक-2 में बचे-खुचे सभी ऑफिस और संस्थान पूरी तरह से खुल चुके हैं। ऐसी परिस्थिति में मुख्य तौर पर एकल परिवारों के छोटे बच्चों को काफी समस्या हो रही है।

  • मम्मी-पापा ऑफिस, छुट रही है बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं
    दिल्ली पब्लिक स्कूल नॉर्थ कोलकाता की पहली कक्षा का छात्र पूर्वारुण चटर्जी अक्सर अपनी ऑनलाइन कक्षा में अनुपस्थित होता है। इस बारे में उसके माता-पिता चटर्जी दंपति का कहना है कि हम दोनों पति-पत्नी बैंक में कार्यरत हैं। जितने दिन वर्क फ्रॉम होम मोड में कार्य हो रहा था, उतने दिन तो पूर्वारुण ऑनलाइन कक्षाओं में अच्छी तरह और रेगुलर शामिल होता था। किन्तु समस्या तब से शुरु हुई, जब लॉकडाउन समाप्त हो गया और संपूर्ण कर्मचारियों के साथ बैंक को खोल दिया गया। अक्सर ऐसा होता है कि हम दोनों पति-पत्नी जब अपने काम पर निकल रहे होते हैं उस समय पूर्वारुण की ऑनलाइन कक्षाएं हो रही होती है। पूर्वारुण की मां रिद्धी चटर्जी ने बताया कि लॉकडाउन पर करीब ढाई महीनों तक घर में रहने के बाद अब हम दोनों में से कोई भी फिर से छुट्टी के बारे में अपने ऑफिस में बोल भी नहीं सकता और पूर्वारुण अभी इतना छोटा है कि उसके हाथों में मोबाइल या लैपटॉप देकर भी हम नहीं जा सकते हैं। घर में ऐसा कोई और बड़ा होता भी नहीं है जो उसे ऑनलाइन कक्षाएं करवा सकें। रिद्धी चटर्जी का कहना है कि इसलिए अब अक्सर पूर्वारुण की ऑनलाइन कक्षाएं छुट जाती हैं। बाद में गूगल क्लासरुम पर मैम द्वारा भेजे गये पाठ्यसामग्री की मदद से उसे पढ़ाया जाता है। यह समस्या केवल पूर्वारुण की नहीं है। उसकी कक्षा में ऐसे कई विद्यार्थी पढ़ते हैं जिनके माता-पिता नौकरीपेशा हैं और बच्चे दादा-दादी के पास पूरे दिन रहते हैं। चुंकि दादा-दादी को नयी तकनीकों का ज्ञान नहीं है इसलिए इन बच्चों की कक्षाएं भी अक्सर छुट जाती हैं। हालांकि इस बारे में स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल में लाकर खासकर बच्चों को पढ़ाना संभव नहीं है। इसलिए एकमात्र उपाय ऑनलाइन कक्षाएं ही हैं। किन्तु अभिभावकों द्वारा बतायी जा रही समस्याएं भी वास्तविक हैं। इसके बारे में भी सोचना होगा।

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