नई दिल्ली : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि वह इस वर्ष दिसंबर में स्वदेश लौटने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और इसके लिए गिरफ्तारी या मौत की सजा का जोखिम उठाने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में लोकतंत्र और न्याय की बहाली करना है।
भारत आने के बाद पहली बार डिजिटल माध्यम से आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हसीना ने कहा, “मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास, धर्मनिरपेक्षता और समृद्धि के रास्ते पर वापस लाने के लिए है।”
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि मुझे जेल भेजा जा सकता है या मेरी हत्या भी हो सकती है, लेकिन मैं अपने लोगों के बीच लौटूंगी।” गौरतलब है कि हसीना 5 अगस्त 2024 को ढाका छोड़कर भारत आई थीं और तब से यहीं रह रही हैं।
पिछले वर्ष नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान उनकी सरकार की कार्रवाई को लेकर कथित मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की है।
हसीना ने भारत की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का घनिष्ठ मित्र रहा है। उन्होंने मौजूदा बांग्लादेश की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि भय का माहौल घरों, कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों तक फैल चुका है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के लोगों के लोकतंत्र और न्याय के संघर्ष में साथ खड़े होने की अपील की।
पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शन केवल शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं थे, बल्कि संगठित समूहों ने उन्हें हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया। उन्होंने कहा, “मुझे अपने देश से दूर रहने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन मैं अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई।”
हसीना के बेटे सजीब वाजिद जॉय ने आरोप लगाया कि अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याओं को वैधता मिल गई है। उनका दावा था कि आज बांग्लादेश कानून-व्यवस्था के गंभीर संकट से जूझ रहा है और भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि उसकी पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश एक और पाकिस्तान बनने की ओर बढ़ रहा है।


