पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण का किया बचाव, कहा- ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी, आयात निर्भरता घटी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (ई20) को लेकर उठ रही आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों और करोड़ों वाहनों में लंबे समय से हो रहे उपयोग के बावजूद ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि ई20 ईंधन से इंजन को असामान्य नुकसान, जंग लगने या वाहनों की आयु कम होने जैसी समस्याएं होती हैं। सरकार का कहना है कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाई है और वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं पर कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम को नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम), वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और अन्य तकनीकी संस्थानों के परामर्श से चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है।
उन्होंने कहा कि एआरएआई, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए प्रयोगशाला अध्ययन तथा फील्ड परीक्षणों से यह स्पष्ट हुआ है कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 ईंधन का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। इन अध्ययनों में पुराने वाहनों के प्रदर्शन में भी कोई उल्लेखनीय गिरावट, इंजन को असामान्य नुकसान या जंग लगने जैसी समस्या सामने नहीं आई।
सरकार के अनुसार, देश में ई15 प्लस ईंधन का उपयोग साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय से और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग ढाई वर्ष से अधिक समय से किया जा रहा है। वर्तमान में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और तीन करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर संचालित हो रही हैं, लेकिन इंजन खराब होने या वाहनों में बड़े पैमाने पर तकनीकी खराबी का कोई प्रमाण नहीं मिला है। वाहन निर्माता भी ई20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए सामान्य रूप से वारंटी दायित्वों का पालन कर रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जो मूल रूप से ई20 के अनुरूप प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद इंजन में जंग, असामान्य क्षति या कलपुर्जों की आयु कम होने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई। एक अन्य वाहन निर्माता ने भी 1.4 करोड़ ई20 वाहनों की दीर्घकालिक निगरानी के बाद ऐसे किसी प्रतिकूल प्रभाव से इनकार किया है।
सरकार ने कहा कि ई20 ईंधन अधिक ऑक्टेन, बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन, स्वच्छ दहन और कम प्रदूषण सुनिश्चित करता है, जिससे इंजन अधिक प्रभावी ढंग से काम करता है। एथनॉल खरीद के संबंध में मंत्री ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां उत्पादकों को उचित मूल्य देने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एथनॉल खरीदती हैं। वर्ष 2025-26 में एथनॉल का औसत मिल मूल्य 66.61 रुपये प्रति लीटर रहा, जबकि जीएसटी और परिवहन सहित इसकी खरीद लागत लगभग 71 रुपये प्रति लीटर रही।
सरकार ने यह भी बताया कि पेट्रोल की कीमतें बाजार आधारित होती हैं, जिन पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर, कर, परिवहन लागत और अन्य परिचालन खर्चों का प्रभाव पड़ता है। इसके बावजूद मार्च से जून 2026 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल बिक्री पर औसतन करीब 11 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ा, जिसकी कुल राशि लगभग 21,300 करोड़ रुपये रही।


