

कोलकाता। महानगर की व्यस्त सड़कों और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक ऐसा दिव्य धाम भी है, जहाँ पहुँचते ही मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता है। उत्तर कोलकाता के आलमबाज़ार स्थित श्री श्याम मंदिर आज केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पूर्वी भारत के सबसे बड़े खाटू श्याम मंदिर के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच “कोलकाता का खाटू धाम” नाम से जाना जाता है।
राजस्थान की भक्ति परंपरा, अब कोलकाता की पहचानखाटू श्याम बाबा की आराधना की शुरुआत राजस्थान के सीकर जिले स्थित प्रसिद्ध खाटू धाम से हुई थी। समय के साथ जब राजस्थान और मारवाड़ी समाज देश के विभिन्न हिस्सों में बसने लगा, तब उन्होंने अपनी आस्था को जीवित रखने के लिए अनेक शहरों में श्याम मंदिरों की स्थापना की। इन्हीं प्रयासों का एक भव्य स्वरूप है आलमबाज़ार का श्री श्याम मंदिर, जिसने आज पूरे पूर्वी भारत के श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक केंद्र प्रदान किया है।
एक भक्त का सपना, जो बन गया करोड़ों श्रद्धालुओं का धाममंदिर के निर्माण की प्रेरणा राजस्थान के सीकर जिले के निवासी एवं कोलकाता में बसे श्रद्धालु गोविंद मुरारी अग्रवाल को मिली। वर्षों पुरानी श्रद्धा ने उन्हें ऐसा भव्य मंदिर बनाने की प्रेरणा दी, जहाँ हर भक्त बिना राजस्थान गए बाबा श्याम के दर्शन कर सके।16 मई 2010 को भूमि पूजन के साथ इस दिव्य परियोजना की शुरुआत हुई। वर्ष 2013 में अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और राजस्थान के मकराना संगमरमर से बने इस मंदिर को राजस्थानी शिल्पकारों ने अपनी उत्कृष्ट कला से सजाया। वर्ष 2020 में मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ और प्रथम तल के गर्भगृह में श्री खाटू श्याम बाबा की दिव्य प्रतिमा की प्रतिष्ठा की गई।
राजस्थानी वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण
मंदिर का प्रत्येक स्तंभ, दीवार और नक्काशी राजस्थानी स्थापत्य कला की उत्कृष्ट झलक प्रस्तुत करती है। चाँदी से सुसज्जित गर्भगृह में विराजमान श्री श्याम बाबा के दर्शन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, हनुमान जी तथा भगवान शिव परिवार के भी सुंदर मंदिर स्थापित हैं, जिससे यह संपूर्ण सनातन परंपरा का आध्यात्मिक केंद्र बन जाता है।
हर आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
प्रतिदिन प्रातः मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन आरती तक पाँच विशेष आरतियाँ आयोजित होती हैं। विशेष रूप से एकादशी और बारस (द्वादशी) के दिन हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं। बारस के दिन मंदिर पूरे दिन खुला रहता है तथा विशेष ज्योत और एकादशी के दिन भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
फाल्गुन उत्सव और फूलों की होली बनते हैं आकर्षण का केंद्र
श्री श्याम जन्मोत्सव, जन्माष्टमी और फाल्गुन उत्सव मंदिर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध है फूलों की होली, जिसमें पूरा मंदिर रंग-बिरंगे पुष्पों से महक उठता है। वर्ष 2026 के फाल्गुन मेले में लगभग दो हजार श्रद्धालुओं ने निशान यात्रा में भाग लिया और भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सिर्फ पूजा नहीं, समाज सेवा भी है उद्देश्य
श्री श्याम मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। मंदिर ट्रस्ट नियमित रूप से रक्तदान शिविर, निःशुल्क स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच शिविर, कंबल वितरण, वर्षभर भंडारा तथा जरूरतमंदों के लिए भोजन और पेयजल जैसी अनेक सामाजिक सेवाएँ संचालित करता है। यही सेवा भावना इस मंदिर को समाज में एक विशेष पहचान दिलाती है।
कोलकाता आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अवश्य दर्शन योग्य स्थल
दक्षिणेश्वर काली मंदिर और हुगली नदी के निकट स्थित यह मंदिर आज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थल बन चुका है। यदि आप कोलकाता में आध्यात्मिक शांति, भव्य राजस्थानी वास्तुकला और बाबा श्याम की दिव्य कृपा का अनुभव करना चाहते हैं, तो आलमबाज़ार स्थित श्री श्याम मंदिर*अवश्य जाएँ।यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि विश्वास, सेवा, संस्कृति और भक्ति का ऐसा संगम है, जिसने कोलकाता के श्री श्याम मंदिर आलमबाज़ार को “पूर्वी भारत का खाटू धाम” बना दिया है।

