बनगांव : 4 भाजपा पार्षदों की तृणमूल में घर वापसी

दावा, पालिका पर दोबारा तृणमूल का कब्जा

-बहुमत को लेकर हाईकोर्ट में लंबित है मामला

कोलकाता : अभी भी कलकत्ता हाईकोर्ट में बनगांव पालिका पर कब्जे (बहुमत) को लेकर एक मामला लंबित है। अदालत का फैसला क्या होगा, किसी को नहीं मालूम। लेकिन इसी बीच लोकसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए 4 पार्षदों की दोबारा पुरानी पार्टी में घर वापसी हुई है। शहरी विकास व निकाय मंत्री फिरहाद हकीम तथा खाद्यमंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक (उत्तर 24 परगना तृणमूल जिलाध्यक्ष) की उपस्थिति में 4 भाजपा पार्षदों ने दोबारा पार्टी में वापसी की। इसके साथ ही 22 पार्षदों के बनगांव पालिका में तृणमूल कांग्रेस पार्षदों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इस तरह बनगांव पालिका पर दोबारा तृणमूल कांग्रेस का दखल कायम हो गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने बहुमत को लेकर दायर याचिका पर अभी भी कोई आदेश नहीं दिया है। हालांकि, अविश्‍वास प्रस्ताव के दिन विपक्षी पार्षदों की अनुपस्थिति के बीच चेयरमैन शंकर आढ्य द्वारा 10 पार्षदों को लेकर जीत का दावा करने पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की थी।

वहीं, गुरुवार को 4 भाजपा पार्षदों को पार्टी में दोबारा शामिल करने के मौके पर फिरहाद ने कहा कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद भय व आतंक की राजनीति की। पार्टी नेताओं व समर्थकों को डरा-धमका कर भाजपा में शामिल किया है। फिरहाद ने कहा कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पार्टी के लोगों के दिलों में बसतीं हैं। भाजपा ने इन पार्षदों को लोभ व भय दिखाकर पार्टी में शामिल किया था। लेकिन ममता बनर्जी के प्रति इनका मोहभंग नहीं हुआ तथा इन्होंने दोबारा पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद एक साथ बनगांव के एक दर्जन पार्षद मुकुल राय के हाथों दिल्ली में झंडा थाम कर भाजपा में शामिल हो गए थे। लेकिन इनमें कई पार्षद पहले ही भाजपा छोड़कर तृणमूल में लौट आए थे। उन्होंने पहले के अविश्‍वास प्रस्ताव के दौरान वोटिंग में हिस्सा भी लिया था। गुरुवार को और 4 पार्षदों ने भी दोबारा तृणमूल कांग्रेस में घर वापसी की। इससे तृणमूल कांग्रेस की क्षमता बनगांव पालिका में 10 से बढ़कर 14 हो गई जबकि भाजपा के 5 पार्षद हैं। एक भाजपा महिला पार्षद ने अविश्‍वास मत के ठीक पहले ही तृणमूल कांग्रेस में वापसी की थी। चुनाव में 21 पार्षद तृणमूल की टिकट पर जीते थे। एक सीट पर माकपा को जीत मिली थी। मालूम हो कि दो दफे 14 पार्षदों ने चेयरमैन शंकर आढ्य के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्ताव लाया था। यह मामली अभी भी हाईकोर्ट मेंं लंबित है। दोबारा तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले पार्षदों में अभिजीत कापूरिया भी शामिल हैं जिन्होंने अविश्‍वास प्रस्ताव के पक्ष(शंकर आढ्य के खिलाफ) में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ऐसे में जब वे दोबारा तृणमूल में शामिल हो गए हैं, देखना दिलचस्प होगा कि अदालत अब आगे क्या आदेश देता है?

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