चुनाव आयोग ने सुनी दलों की शिकायत

-विपक्षी दलों ने हिंसा की आशंका जताई
-तृणमूल ने विपक्ष का आरोप खाजिर किया

-तीन जिलों के डीएम-एसपी को सावधान किया
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों संग बैठक करने के साथ ही शनिवार को राजनीतिक दलों संग भी सर्वदलीय बैठक कर उनकी शिकायतें सुनी। उप-मुख्य चुनाव आयुक्त सुदीप जैन ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस व वाम मोर्चा के प्रतिनिधियों की शिकायतें सुनी। इस बीच सूत्रों का दावा है कि तृणमूल को छोड़कर सभी विपक्षी दलों ने राज्य में हिंसा की आशंका जताते हुए आयोग से हिंसामुक्त चुनाव कराने की मांग की। हालांकि, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने आयोग से कहा कि विपक्षी दल हार के भय से छलावा कर रहे हैं तथा आयोग को भ्रमित करने की साजिश कर रहे हैं। इस बीच खबर है कि चुनाव आयोग ने 3 जिलों के डीएम व एसपी को सावधान करते हुए कहा है कि हिंसा की जिम्मेवारी उन्हें लेनी होगी अन्यथा वे हिंसा रोकने के लिए कठोर कार्रवाई करें। दक्षिण 24 परगना के एसपी को भी आयोग ने सावधान किया है।

शांति है, चतुराई कर रहा विपक्ष : पार्थ
उप-मुख्य चुनाव आयुक्त संग बैठक के बाद तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने पत्रकारों से कहा कि विपक्ष के पास कोई एजेंडा नहीं है। हार का भय उन्हें सता रहा है। बंगाल में पूरी शांति है। केवल आयोग को भ्रमित करने के लिए ही विपक्ष छल व चतुराई का रास्ता अपना रहा है। उन्होंने कहा कि सभी बूथों को सुुपर सेंसेटिव बूथ घोषित करने की मांग विपक्ष की मांग हास्यास्पद है। विपक्षी दल अपनी कमजोरी दबाने के लिए ही बंगाल को बदनाम करने की साजिश कररहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा तो कभी कोर्ट गई तो कभी दिल्ली चुनाव आयोग कार्यालय। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ हिस्से की आड़ लेकर भाजपा व अन्य दल मिथ्याचार फैला रहे हैं। हम भी फ्री व फेयर चुनाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कई मीडिया सुपर सेंसेटिव बूथ के नाम पर हवा गर्म कर बंगाल का अपमान कर रहे हैं।

ममता के सरकारी आदेश का वीडियो सौंपा : मुकुल
भाजपा नेता मुकुल राय ने उप-चुनाव आयुक्त संग बैठक के बाद कहा कि उन्होंने ममता बनर्जी को वह वीडियो आयोग को सौंपा है जिसमें वे फोन पर सरकारी काम का आदेश देते देखी जा रहीं हैं। यह चुनावी आचार संहिता का उलंघन है। मुकुल ने कहा कि हम फिर मांग करते हैं कि आयोग राज्य के सभी बूथों को अति संवेदनशील घोषित करे जिससे मतदाता अपने-अपने मतों को प्रयोग कर सके। उन्होंने कहा कि हमने कोई नई मांग नहीं रखी है। हमने वही मांग की है जो ममता बनर्जी ने 2009 के लोकसभा व 2011 के विधानसभा चुनाव में वाम दलों के खिलाफ की थी। हमने वो चिठ्ठी(कॉपी) भी आयोग को सौंपी है। उस पर ममता बनर्जी ने हस्ताक्षर किया था। मुकुल ने कहा कि हम आयोग से कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे। केवल फ्री व फेयर चुनाव की मांग कर रहे हैं।

जिलाध्यक्ष बन गए हैं डीएम-एसपी : रोबिन
वाम मोर्चा की ओर से पहुंचे रोबिन देव ने कहा कि डीएम व पुलिस सुपर तृणमूल जिलाध्यक्षों की तरह व्यवहार कर रहे हैं। मालदह व कूचबिहार के डीएम व एसपी की शिकायत की है। तीन साल नहीं हुए लेकिन वे तृणमूल जिलाध्यक्ष की तरह आचरण कर रहे हैं जैसे कभी भारती घोष जंगलमहल में ममता बनर्जी के पक्ष में काम करती थी। उन्होंने कहा कि हमने डायमंडहार्बर के एसडीपीओ को हटाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि जहां पिछली बार हिंसा नहीं हुई, वहां तृणमूल को वोट नहीं मिले। वहां अति-संवेदनशील बूथ घोषित किए गए थे। लेकिन जहां हमले की आशंका थी, वहां अति-संवेदनशील बूथ घोषित नहीं किया गया था। उन्होंने कही कि सरकारी मीडिया की भी शिकायत की है। क्या ऑल इंडिया रेडिया व दूरदर्शन केवल मोदी व ममता के ही दर्शन कराएंगे??

शांतिपूर्ण मतदान निश्चित हो : प्रदीप
वहीं, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि हमने आयोग से राज्य में हिंसामुक्त शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई जिलों से चुनाव घोषित होने के बाद हिंसा की खबरें आ रही हैं। हिंसा में एक कांग्रेस समर्थक की हत्या भी हो चुकी है। हमने इस बारे में आयोग से शिकायत की तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की कि मतदाता अपने मताधाकिर को प्रयोग कर सके। कांग्रेस नेता ने कहा कि हमने आयोग से कहा कि वे संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती निश्चित करे।

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