बंगाल में अब हड़ताल के कारण श्रम दिवस का नुकसान नहीं होता: ममता बनर्जी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दुनिया के विभिन्न देशों के निवेशकों को राज्य में निवेश के लिये आमंत्रित करते हुए बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने हड़ताल और अन्य बाधाओं के कारण श्रम दिवस में होने वाले नुकसान को समाप्त कर दिया है, जबकि पूर्ववर्ती वाम दल सरकार में यह 75 लाख प्रतिवर्ष था।
बनर्जी ने बंगाल वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन में उद्योगपतियों और निवेशकों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना भी साधा। उन्होंने राज्य के राज्यपाल जगदीप धनकड़ से केंद्र से बात कर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि राज्य में उद्योगपतियों को ‘कुछ एजेंसियों द्वारा परेशान’ न किया जाए।
उनकी इस टिप्पणी को राज्यपाल के उद्घाटन भाषण की संभावित प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। धनखड़ ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री को बंगाल में समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ‘पक्षपातपूर्ण रुख’ से राज्य को दूर करने की सलाह दी थी।
मुख्यमंत्री ने 72,000 करोड़ रुपये की लागत से जंगलमहल क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना की भी घोषणा की। यह औद्योगिक क्षेत्र मालगाड़ियों के लिये अलग से बने रहे पूर्वी गलियारे से लगा होगा।
सम्मेलन में अडाणी समूह के प्रमुख गौतम अडाणी ने अगले एक दशक के दौरान पश्चिम बंगाल में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने पुरुलिया में ‘जंगलमहल सुन्दरी कर्मनगरी’ परियोजना के लिये 2,483 एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटित की है। यह जमीन अमृतसर-दानकुनी पूर्वी मालगाड़ी गलियारे के पास है।’’
उन्होंने कहा कि राज्य आने वाले समय में विकास के आठ क्षेत्रों में काम करेगा। इसमें बुनियादी ढांचा, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और कारोबार सुगमता शामिल हैं।
बनर्जी ने कहा, ‘‘बंगाल पहला राज्य है, जिसने कोरोना महामारी के बाद आमने-सामने की बैठक के साथ व्यापार सम्मेलन का आयोजन किया है। यह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के साथ बांग्लादेश, भूटान और नेपाल तथा दक्षिण -पूर्व एशिया के लिये द्वार है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछली वाम दलों की सरकार में हर साल 75 लाख श्रम दिवसों का नुकसान होता था लेकिन अब ऐसा नहीं होता।’’
मुंख्यमंत्री ने कहा कि शेल गैस की खोज को लेकर तुरंत लाइसेंस देने के लिये नीति तैयार की गयी है। वर्ष 2023 तक राज्य राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़ जाएगा।
हालांकि, बनर्जी ने अपने संबोधन में किसी केंद्रीय एजेंसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा हाल में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कुछ प्रमुख कंपनियों पर कार्रवाई की ओर था। उनके इस बयान की सम्मेलन में मौजूद उद्योगपति के एक वर्ग ने सराहना भी की।
उन्होंने अपने संबोधन के आखिर में कहा, ‘‘राज्यपाल के जरिये मैं कहना चाहती हूं… राज्यपाल सर, आप उद्योगपतियों की तरफ से यह संदेश पंहुचा दें क्योंकि उद्योगपति कुछ बोल नहीं सकते हैं। हम केंद्र सरकार से हर तरह की मदद चाहते हैं। हम चाहते हैं कि राज्यपालों के अगले सम्मेलन में आप इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष रखें। कृपया यह देखिये कि उद्योगपतियों को कुछ एजेंसियों द्वारा परेशान नहीं किया जाए।’’
इससे पहले, सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद राज्यपाल ने कहा था कि राज्य में काफी क्षमता है। उन्होंने बनर्जी के नेतृत्व को ‘परिपक्व’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल अवसरों का क्षेत्र रहा है, जिसे अपनी पिछली सफलता की कहानी को दोहराने की जरूरत है। स्वतंत्रता के समय बंबई प्रांत के साथ बंगाल भारत के सबसे औद्योगिकीकृत प्रांत था।’’
हालांकि, राज्यपाल ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री को विकास को गति देने और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ‘राज्य को पक्षपातपूर्ण रुख से दूर रखने’ की जरूरत है।

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