लॉकडाउन की जहां बढ़ी है अवधि, वहीं बढ़ी है मानसिक बीमारी भी

डर और सबसे ज्यादा बढ़ा है “घरेलू अत्याचार”

मनोचिकित्सकों की राय ” पॉजिटिव सोंचे, पॉजिटिव रहे”


बबीता माली
कोलकाता : कोरोना वायरस महामारी से आज सारा विश्व जूझ रहा है। कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए लॉकडाउन किया गया है। मगर जैसे जैसे लॉकडाउन की अवधि बढ़ रही वैसे – वैसे लोगों में मानसिक बीमारी व दबाव बढ़ रही है। अनिद्रा, नौकरी खोने का डर, मौत का खौफ और सबसे ज्यादा जो बढ़ रहा है वह है ” घरेलू अत्याचार”। महानगर के मनोचिकित्सकों का कहना है कि लॉकडाउन ने लोगों की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया है लेकिन उससे उबरने के लिए लोगों को हिम्मत से काम लेना होगा। इस मामले में कोलकाता की एक मनोचिकित्सक सुमना बागची ने कई मुद्दों को सामने लाया है और उन्होंने इन सब के पीछे के कारण को भी स्पष्ट किया है। उन्होंने इस मामले कई लोगों की काउंसलिंग भी की है और लोगों को काउंसलिंग लेने की हिदायत भी दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि लॉक डाउन को मानना बहुत जरूरी है।


रोजाना की रूटीन में बदलाव का आना
उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के कारण लोगों की रोजाना की रूटीन में काफी बदलाव आया है। सारा दिन घर पर रहना पड़ रहा है जबकि पहले एक समय पर ऑफिस जाने से लेकर घर का सारा काम योजनाबद्ध तरीके से होता था। मगर आज लॉक डाउन के कारण लोगों के मन में कई तरह के विचार उत्पन्न हो रहे है। किसी को नौकरी खोने का डर सता रहा है तो किसी को मौत का। इससे लोगों के व्यवहार में भी बदलाव देखा जा रहा है।लोगों में चिड़चिड़ापन भी आ गया है। यह सब लॉक डाउन में अचानक घर पर अनलिमिटेड अवधि के लिए बंद हो जाने के कारण हो रहा है।


घरेलू अत्याचार के मामलों में आया है सबसे ज्यादा इजाफा

सुमना बागची का यह भी कहना है कि उनके पास रोजाना ही लोग फोन करते है। इन सब में एक चीज ज्यादा सामने आ रही है वह है घरेलू अत्याचार का। यह घरेलू अत्याचार सिर्फ महिलाओं पर ही नहीं बल्कि बच्चा से लेकर पुरुष भी हो रहा है। घरेलू अत्याचार में किसी को पीटना ही नहीं बल्कि बातों से भी किसी के मन को दुःख देना शामिल है। लॉक डाउन के कारण नौकरानी नहीं आने से सारा काम पत्नियों को करना पड़ रहा है। ऐसे में देखा जा रहा है कि उनके काम में और खाने में पति, सास और ससुर कमी निकाल रहे है। इससे उनके मन को चोट पहुंच रही है। शारीरिक मार से ज्यादा भयानक होती है मानसिक तौर पर किसी को बेइज्जत करना लॉक डाउन में यह भी देखा जा रहा है कि दंपति में विवाद बढ़ रहे है। उसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अलावा स्पेशल चाइल्ड को लेकर भी समस्या सामने आ रही है


सोशल मीडिया के कारण हो रही है अनिद्रा की बीमारी


उन्होंने अनिद्रा को लेकर भी कुछ कारण बताए है जिसके कारण आजकल लोगों में अनिद्रा की बीमारी पैदा हो रही है। देर सोना और देर उठना इसके कारण लोगों में डर बैठ रहा है कि आने वाले दिनों में क्या होगा। उन्होंने बताया कि आजकल लोग ज्यादा से ज्यादा समय सोशल मीडिया यानी फेसबुक, वाट्सएप, टिक टोक पर बिता रहे है। ज्यादा देर तक रहने से नींद गायब हो जा रही है और लोग अनिद्रा का शिकार हो रहे है।

उबरने के लिए मनोचिकित्सकों के कुछ टिप्स
१. हमेशा पॉजिटिव सोच रखें। सब कुछ एक ना एक दिन अच्छा होगा। इसपर विश्वास रखें।
२. क्रिएटिव करने की सोचे। जो अच्छा लगता है वह करें।
३. बच्चों के साथ समय बिताये।
४. बुजुर्गों के साथ समय व्यतित करें। उनमें सबसे ज्यादा डर है।उनसे बात कर उन्हें हिम्मत दे।
५. पुरानी यादें यानी ओल्ड मेमोरी, अच्छी यादों को याद करें। पुरानी एल्बम, पुरानी वीडियो, बचपन के फोटो देखें।
६. अभी विज्ञान ने काफी तरक्की की है। इससे पहले भी महामारी हुई है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
७. मृत्यु की खबरों को ना सुनना ही अच्छा है।
८. इस दौरान पति – पत्नी को क्वालिटी वक़्त बिताने का समय मिला है। लॉक डाउन के पॉजिटिव चीजों को भी देखे।

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